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Sun, 01 Mar 2026 12:27 AM

तौबा व इस्तिगफार और गुनाहों की माफी माँगना अल्लाह की बारगाह में पसंदीदा दुआएं हैं

खानकाह निजामिया में आयोजित रुहानी इज्तेमा व महफीले शब-ए-बारात समारोह से उलेमा का खिताब

संतकबीर नगर, उत्तर प्रदेश

जुमेरात को शब ए बरात के अवसर पर भारत के प्रसिद्ध सूफी बुजुर्ग इस्लामिक विद्वान हजरत सुफी निजामुद्दीन मुहद्दिस बस्तवी की दरगाह स्थित खानकाहे निजामिया अगया में रूहानी इज्तिमा का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता आल इंडिया बज़्मे निज़ामी के चेयरमैम मौलाना जियाउल मुस्तफा निजामी ने की और संचालन हारून अलीमी ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ कुरआन की तिलावत से क़ारी राज मुहम्मद रजवी ने किया।कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने शब-ए-बरात के महत्व पर प्रकाश डालते हुए अपने विचार व्यक्त किए ।मौलाना बदरुद्दीन निजामी ने कहा की अल्लाह इस रात को फरियाद करने वालो के सारे गुनाह माफ कर देता है।

शब-ए-बरात खुदा की इबादत, गुनाहों से निजात, माफी मांगने, बख्शीश और तोबा करने की रात है। इस रात खुदा की रहमत बरसती है। 

मौलाना मौलाना अकील मिस्बाही सिवान ने कहा कि शब का अर्थ रात और बरात का अर्थ छुटकारा और माफी मिलना।

शब-ए-बरात जहन्नुम से छुटकारा पाने और गुनाहों से माफी मांगने की रात है।

 मौलाना आफताब आलम अशरफी ने

 कहा कि हजरत मोहम्मद सल्लाहु अलैहि वसल्लम की बीवी हजरत आयशा फरमाती हैं कि हुजूर सल्लाहु अलैहि वसल्लम कमरे में बिस्तर पर सोए हुए थे तो रात में उनकी आंख खुली तो देखा कि हुजूर कमरे में नही हैं। बाहर निकल कर देखा कि मदीना की कब्रिस्तान जन्नतुलबकी में मोहम्मद सल्लाहु अलैहि वसल्लम अपनी उम्मत की मगफिरत के लिए दुआ कर रहे हैं।

हजरत मोहम्मद सल्लाहु अलैहि वसल्लम वापस आए तो रात में जागने की वजह पूछने पर बताया कि आज शब-ए- बरात है।

आल इंडिया बज़्मे निज़ामी के चेयरमैम मौलाना जियाउल मुस्तफा निजामी ने कहा की शब-ए-बारात की रात बहुत ही अफजल होती है । इस रात को अल्लाह सबकी किस्मत,रोजी,उम्र, तकदीर का फैसला नाफिज करने के लिए फरिश्तों के सुपुर्द फरमाता है।

 कार्यक्रम में नात ख्वां माह ताब निजामी,नुमान रजा निजामी,असद निजामी,माजिद निजामी ने अपनी नात से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

सलात व सलाम के बाद अंत में मौलाना जियाउल मुस्तफा निजामी ने देश की शान्ति और सद्भाव के प्रार्थना की।इस अवसर पर मौलाना मोहम्मद सईद निजामी,मौलाना सेराजुद्दीन निजामी,मौलाना मुहिब्बुर्रहमान मिस्बाही,हकीम रजाउल मुस्तफा निजामी,मुफ्ती शकील निजामी,हाफीज महबुब,हाफिज रिजवान,हाफ़िज़ मजीद निज़ामी, साहिबज़ादा मुहम्मद अबू बक्र निज़ामी, साहिबज़ादा मुहम्मद उस्मान निज़ामी, साहिबज़ादा मुहम्मद अली निज़ामी, साहिबज़ादा गुलाम हसन, गुलाम हुसैन निज़ामी, साहिबज़ादा अब्दुल कादिर निज़ामी आदि के साथ ही बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

लोगों ने धूमधाम से मनाया शब ए बरातऔार इबादत की। आसपास के तमाम मुस्लिम बहुल इलाकों समेत शहरी तथा ग्रामीण में कब्रिस्तानों व मस्जिदों को भव्य रूप से सजाया गया था। शब-ए-बारात को लेकर पूरी रात लोग जागते रहे, मस्जिदें रौशन रहीं और कब्रिस्तान रहे गुलजार । लोग घरों एवं मस्जिदों में पाक कुरान शरीफ के आयतों की तिलावत करते रहे और घूम घूम कर कब्रिस्तानों एवं हजरत सुफी निजामुद्दीन की मजार पर फातेहा पढ़ते रहे। बड़ों के साथ ही बच्चे भी सर पे टोपियां लगाए बुजुर्गों की मजारों पर दुआ मांगने गए । लोगो ने विशेष नमाजें अदा की । बच्चों में इस त्योहार को लेकर खासा उत्साह था । 

सारे मुस्लिम मगरिब की नमाज से लेकर फजर की नमाज तक इबादत में लगे रहे और अल्लाह से रो-रो कर अपने और अपने से जुदा हुए बुजुर्गों के गुनाहों की माफी मांगते रहे। शाम होते ही मुस्लिम लोगों ने फातिहा खानी की और उसके बाद इबादत में लग गए। रोज रातों में वीरान रहने वाला नगर व ग्रामीण इलाकों के कब्रिस्तान मंगलवार की रात को रोशनी से जगमगा उठा। लोग पूरी रात कब्रिस्तान जाते दिखाई दिए और वहां जा कर फातिहा पढ़ी ।,खानकाह ए निजामिया,में रात भर फातेहा पढ़ने आने वाले लोगों का सिलसिला चलताकिया।

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