युवाओं में नशीली पदार्थ लेने का क्रेज बढ़ा,चहुंओर मिलने से खाना,सूंघना हुआ आसान।
शहाबुद्दीन अहमद
बेतिया, बिहार।
इन दिनों शहरी क्षेत्र से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक चहुंओर आसानी से नशीली पदार्थ सैन्फिक्स,बोनिफेस,सुलेशन
एवंअन्य रासायनिक पदार्थ का नशे के रूप में तेजी से उपयोग किया जा रहा है।
शहर के विभिन्न चौक चौराहा सागर पोखरा,स्टेशन चौक, हरिवाटिका चौक,बस स्टैंड चौक,बसवरिया पीपल चौक कालीबाग चौक,छावनी चौक
दुवारदेवी चौक,इलम राम चौक,संतघाट चौक,इत्यादि जगहों पर खुल्लम खुल्ला
यह नशीली पदार्थ बिक रहे हैं
इसकेअलावा सभी दवा दुकान,पंसारी के दुकान,चाय पान की दुकान,गुमटी,झोंपड़ी
में आसानी से मिल जा रहे हैं, जहां से युवा वर्ग खरीद कर नशा का इस्तेमाल कर रहे हैं। विशेषकर,आर्थिक रूप से कमजोर,मजदूर वर्ग से जुड़े बच्चे जो छोटे-मोटे काम कर अपने आजीविका चलाते हैं, इस नशे केअधिक शिकार हो रहे हैं। संवाददाता ने भी सभी क्षेत्रों का भ्रमण करने पर, स्थानीय निवासियों ने बताया कि कई बच्चे खुलेआम इन रासायनिक पदार्थों को खरीदने और उनकी गंध सूंघते,खाते हैं,कम कीमत आसानी से उपलब्धता के कारण यह नशा युवकों में तेजी से फैल रहा है। स्थानीय डॉक्टरों ने भी संवाददाता को बताया कि सॉल्यूशन का नशा बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। रासायनिक पदार्थों के लगातार सेवन से शरीर का सामान्य विकास रुक सकता है।इसका सबसेअधिकअसर फेफड़े और लीवर पर पड़ता है,लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने से मानसिक मस्तिष्क की क्षमता भी प्रभावित होती है,जिससे बच्चों की स्मरण शक्ति, एकाग्रता,सीखने की क्षमता कमजोर हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस समस्या से निपटने के लिए केवल प्रशासनिक कार्रवाई ही पर्याप्त नहीं, बल्कि सामाजिक स्तर पर जागरूकता,गार्जियन, माता-पिता,सगे संबंधी,पास पड़ोस को भी इन बच्चों पर विशेष नजर रखनी पड़ेगी। इसके लिए विद्यालयों, सामाजिक संगठनों,स्वास्थ्य विभाग को भी संयुक्त रूप से जागरूकता अभियान चलाने कीआवश्यकता प्रतीत हो रही है,यदि समय रहते इस बढ़ती प्रवृत्ति पर रोक नहीं लगाई गई तो आने वाली पीढ़ी की स्वास्थ्य भविष्य के लिए गंभीर संकट बन सकती है। समाज,परिवार,प्रशासन को मिलकर इस समस्या के समाधान के लिए प्रभावी कदम उठाने पड़ेंगे।