Tranding
Thu, 21 May 2026 02:39 AM
शिक्षा / Apr 02, 2026

निजी विद्यालयों के मनमानी पर शिक्षा विभाग का कोई नियंत्रण नहीं।

गार्जियन का शोषण,फीस,किताब कॉपी, ड्रेस में लुट।

शहाबुद्दीन अहमद

बेतिया, बिहार।

इस जिले के शहरी वो  ग्रामीण क्षेत्रों में कुकुरमुत्ता की तरह निजी विद्यालय का संचालन किया जा रहा है, इसमें कई ऐसे निजी विद्यालय हैं,जो शिक्षा विभाग के द्वारा निबंधित नहीं है,इन सभी निजी विद्यालयों पर शिक्षा विभाग का कोई नियंत्रण नहीं है।इन विद्यालयों के व्यवस्थापक एवं संचालक की मनमानी चरम सीमा पर पहुंच गई है,

इन विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं केअभिभावक माता-पिता उनके शोषण से परेशान है,इन निजी विद्यालयों के द्वारा ऐसे ऐसे नियम,कानून लागू किया जाता है जो असहनीय है, मगर माता-पिता और अभिभावक की मजबूरी बन उनके नियमों का पालन करना,क्योंकि बच्चों की पढ़ाई की समस्या सामने आ जाती है।इन निजी विद्यालयों के द्वारा माता-पिता/ अभिभावक पर इतना आर्थिक बोझ डाला जाता है 

या ऐसा कहा जा सकता है किआर्थिक शोषण किया जाता है।इन विद्यालयों के व्यवस्थापक/संचालकों के द्वारा री-एडमिशन,फीस का बोझ,बच्चों की किताब कॉपी ड्रेस,विद्यालय से ही खरीदने की मजबूरी से माता-पिता/ अभिभावक परेशान है।इन निजी विद्यालयों के द्वारा री- एडमिशन हेतु राशि की उगही

प्रत्येक वर्ष छात्रों के वर्गों के किताब में बदलाव,महंगी किताब कॉपी,ड्रेस खरीदना 

गले पर छुड़ी चलने जैसा है।

इन निजी विद्यालयों के द्वारा प्रत्येक वर्ष सिलेबस का बदलाव,वर्गों में किताब का बदलाव हो जाने के कारण माता-पिता/गार्जियन/ अभिभावक को प्रतिवर्ष री- एडमिशन/फीस/किताब कॉपी,ड्रेस एवं अन्य संबंधित सामानों की खरीदारी में अत्यधिक राशि खर्च करनी पड़ रही है। वर्गों की किताबों में बदलाव होने के कारण नीचे वर्ग से ऊपर वर्ग में जाने वाले बच्चों कोअपने भाई-बहनों की किताबों को लेकर पढ़ने की जिज्ञासा समाप्त हो जा रही है,साथ ही

माता-पिता/अभिभावक/गार्जियन काआर्थिक शोषण हो जा रहा है।इन निजी विद्यालयों के द्वारा री - एडमिशन,फीस,किताब कॉपी,ड्रेस,इत्यादि विद्यालय से ही खरीदने की मजबूरी से

आर्थिक शोषण किया जा रहा है।

Jr. Seraj Ahmad Quraishi
37

Leave a comment

logo

Follow Us:

Flickr Photos

© Copyright All rights reserved by Bebaak Sahafi 2026. SiteMap