मेराज शरीफ में मिला नमाज का तोहफा - मुफ्तिया गाजिया खानम
तुर्कमानपुर में महिलाओं की 28वीं संगोष्ठी।
सैय्यद फरहान अहमद
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।
मकतब इस्लामियात तुर्कमानपुर में महिलाओं की 28वीं मासिक संगोष्ठी हुई। कुरआन-ए-पाक की तिलावत खुशी नूर ने की। नमाज की अहमियत और सही तरीका शिफा खातून ने बताया। अध्यक्षता ज्या वारसी ने की।
मुख्य अतिथि मुफ्तिया गाजिया खानम अमजदी ने कहा कि अल्लाह ने दुनिया में कमोबेश सवा लाख पैगंबरों को भेजा, लेकिन शबे मेराज में सिर्फ आखिरी नबी व रसूल हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की ही अर्श-ए-आजम से आगे ला मकां में अल्लाह से मुलाकात हुई। पैगंबर-ए-इस्लाम ने कई बार अल्लाह के दरबार में हाजिरी दी, कलाम किया और अल्लाह के दीदार से सरफराज हुए। तोहफे में पचास वक्त की नमाज मिली जो बाद में अल्लाह ने पांच वक्त की कर दी। पैगंबर-ए-इस्लाम पर मेराज शरीफ की मुबारक रात में अहकामे खास नाजिल हुए। अल्लाह ने पैगंबर-ए-इस्लाम को अजीम इज्जतो वकार से नवाजा। सात आसमानों की सैर कराई गई। जन्नत व दोजख दिखाई गई। तमाम अजीम पैगंबरों व फरिश्तों से पैगंबर-ए-इस्लाम की मुलाकात हुई। शबे मेराज का जिक्र कुरआन व हदीस की बेशुमार किताबों में कसरत के साथ है।
विशिष्ट वक्ता मुफ्तिया शहाना खातून ने कहा कि मेराज की रात में पैगंबर-ए-इस्लाम ने रात के एक भाग में मस्जिद-ए-हराम से मस्जिद-ए-अक्सा तक यात्रा की, जिसका वर्णन कुरआन में अल्लाह ने सूरह बनी इस्राइल में किया है। मस्जिद-ए-अक्सा से पैगंबर-ए-इस्लाम सात आसमानों की सैर पर गए। आसमानी यात्रा को मेराज कहा जाता है। इसका वर्णन कुरआन में अल्लाह ने सूरह नज्म में किया है और अन्य बातें हदीसों में विस्तृत रूप में बयान हुई हैं।
संचालन सादिया नूर ने किया। सामूहिक नात-ए-पाक नूर अक्सा, नूर फातिमा व अनम ने पेश की। एकल नात सना फातिमा ने पेश की। अंत में दुरूद ओ सलाम पढ़कर मुल्क में अमन की दुआ मांगी गई। संगोष्ठी में जिक्रा शेख, अख्तरुन निसा, शबाना खातून, रजिया, अस्गरी खातून, आस्मां खातून, फिजा खातून, आलिमा, समीना अमजदी, आलिया, मुस्कान आदि मौजूद रहीं।
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