सिकंदरपुर में पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह की 31वीं पुण्यतिथि श्रद्धा से मनाई गई।
धनंजय कुमार शर्मा
सिकंदरपुर, बलिया, उत्तर प्रदेश।
अखिल भारतीय विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा के तत्वावधान में गुरुवार को सिकंदरपुर स्थित गांधी आश्रम परिसर में भारत के पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह की 31वीं पुण्यतिथि श्रद्धा, सम्मान और गरिमा के साथ मनाई गई। इस अवसर पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में समाज के पदाधिकारियों, वरिष्ठ कार्यकर्ताओं, युवाओं एवं स्थानीय नागरिकों ने बड़ी संख्या में सहभागिता की।
कार्यक्रम का शुभारंभ पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह के चित्र पर पुष्प अर्पित कर तथा दो मिनट का मौन रखकर किया गया। इसके बाद वक्ताओं ने उनके जीवन, व्यक्तित्व और राष्ट्र के प्रति उनके अतुलनीय योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला।
सभा के मुख्य अतिथि महासभा के प्रांतीय उपाध्यक्ष लल्लन विश्वकर्मा ने कहा कि ज्ञानी जैल सिंह का जीवन सादगी, संघर्ष और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक रहा। साधारण परिवार से निकलकर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचना उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति, ईमानदारी और कर्मठता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि आज के युवाओं को ज्ञानी जैल सिंह के जीवन से प्रेरणा लेकर समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए। कहा कि ज्ञानी जैल सिंह ने अपने पूरे जीवन में देश की एकता, अखंडता और लोकतांत्रिक मूल्यों को सर्वोपरि रखा। उनके बताए मार्ग पर चलकर ही देश को प्रगति की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने युवाओं से शिक्षा, अनुशासन और राष्ट्रसेवा को जीवन का लक्ष्य बनाने का आह्वान किया।
पुण्यतिथि सभा में समाज के कई पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे। इस दौरान प्रखर समाज सेवी सत्येंद्र शर्मा, रवि शर्मा, सियाराम शर्मा, सत्यानारायण शर्मा, विजय शर्मा, डॉ. उमेश चंद्र, जितेंद्र सोनी, ओमनारायण शर्मा और अमरनाथ शर्मा सहित अनेक गणमान्य लोगों ने अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने ज्ञानी जैल सिंह के आदर्शों को आत्मसात करने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया। सभा की अध्यक्षता राजेश शर्मा ने की, जबकि कार्यक्रम का सफल संचालन नंद किशोर शर्मा ने किया।