इस्लाम में अकाइद की अहमियत सबसे अधिक है - अनस नक्शबंदी
इस्लामी अकीदे की विशेष कार्यशाला का आगाज।
सैय्यद फरहान अहमद
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।
इस्लामी भाईयों के लिए पांच सप्ताह तक चलने वाली इस्लामी अकीदे की विशेष कार्यशाला का शुभारंभ सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफरा बाजार में किया गया। कुरआन-ए-पाक की तिलावत व नात-ए-पाक हाफिज रहमत अली निजामी ने पेश की।
मुख्य वक्ता कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी ने कहा इस्लाम में अकाइद (आस्था या विश्वास) की अहमियत सबसे अधिक है, क्योंकि यह पूरे धर्म की बुनियाद है। जिस तरह एक इमारत बिना नींव के खड़ी नहीं रह सकती, उसी तरह बिना सही अकाइद के इस्लाम मुकम्मल नहीं होता। अल्लाह, उसके रसूलों, फरिश्तों और आखिरत पर यकीन रखना ही धर्म का आधार है। किसी भी नेक काम (जैसे नमाज, रोजा, जकात, हज, सदका, खैरात) की अल्लाह के यहां तब तक कोई कीमत नहीं है, जब तक कि वह सही अकाइद (ईमान) के साथ न किया जाए। सही अकीदा इंसान को दुनिया में भटकाव से बचाता है। यह उसे सिखाता है कि उसका पैदा करने वाला कौन है और उसके जीवन का उद्देश्य क्या है। आखिरत में सफलता का दारोमदार ईमान पर है। सही अकाइद रखने वाला व्यक्ति ही जन्नत का हकदार है। जब एक इंसान का अकीदा मजबूत होता है कि हर चीज अल्लाह के इख्तियार में है, तो वह मुश्किल समय में भी सब्र रखता है और घबराता नहीं है।
अंत में दुरूद ओ सलाम पढ़कर भारत में अमन ओ अमान की दुआ मांगी गई। कार्यशाला में आसिफ महमूद नक्शबंदी, नेहाल अहमद नक्शबंदी, शीराज सिद्दीकी, एडवोकेट मुहम्मद आजम, याकूब खान, महबूब आलम, अली अफसर, आसिफ, शाबान, शहनवाज अहमद, जीशान, जावेद, रूशान, मो. अरीब सहित तमाम लोग मौजूद रहे।