हलाल कमाने, हराम से बचने व इल्म की फजीलत बताई गई।
इस्लामी बहनों की विशेष कार्यशाला।
सैयद फरहान अहमद
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।
मदरसा रजा-ए-मुस्तफा तुर्कमानपुर व जामिया अल इस्लाह एकेडमी नौरंगाबाद, गोरखनाथ में इस्लामी बहनों की विशेष कार्यशाला हुई। कार्यशाला के नौवें सप्ताह में हलाल कमाने, हराम से बचने व इल्म की फजीलत बताई गई। दरूद बॉक्स बनाने वाली नूरजहां, सादिया नूर, सानिया आलम, फिरदौस, जिक्रा शेख, साहिबा, हिफ्जा करीम, माइशा, नुजहत को पुरस्कृत किया गया।
मुख्य वक्ता हाफिज रहमत अली निजामी ने कहा कि इस्लाम में 'इल्म' (ज्ञान) प्राप्त करना अनिवार्य धार्मिक कर्तव्य है। जिसे कुरआन और हदीस में बार-बार बताया गया है। यह सिर्फ धार्मिक शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सांसारिक और वैज्ञानिक ज्ञान भी शामिल है। ज्ञान व्यक्तियों को सशक्त बनाता है। ज्ञान अज्ञानता को दूर करता है। ज्ञान जीवन की चुनौतियों से निपटने में मदद करता है। ज्ञान प्राप्त करना इबादत का एक रूप है। एक आलिम (विद्वान) की श्रेष्ठता एक आम इबादत करने वाले पर ऐसी है, जैसे चांद की रोशनी तमाम सितारों पर। कुरआन की सबसे पहली नाजिल (उतरी) हुई आयत पढ़ने के महत्व पर जोर देती हैं। इस्लाम में इल्म एक प्रकाश है जो इंसान को अल्लाह की पहचान, सही और गलत के बीच फर्क करने, और इस दुनिया में एक जिम्मेदार और उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने में मदद करता है। ज्ञान को पालने से लेकर कब्र तक हासिल करने की ताकीद की गई है।
संचालन करते हुए कारी मुहम्मद अनस रजवी ने कहा कि हलाल आय ईमानदारी, निष्पक्षता और नैतिक अखंडता पर आधारित होती है।इस्लाम में हलाल कमाई का अर्थ उस आय से है जो इस्लामी कानून (शरिया) के अनुसार वैध, नैतिक और अनुमेय तरीकों से प्राप्त की जाती है। यह केवल एक आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक दायित्व है जिस पर कुरआन और हदीस में बहुत जोर दिया गया है। सभी वित्तीय लेन-देन में ईमानदारी बरतना और धोखा, बेईमानी या शोषण से बचना आवश्यक है। आय उन स्रोतों से नहीं आनी चाहिए जिन्हें इस्लाम में स्पष्ट रूप से 'हराम' (निषिद्ध) माना गया है। कमाई का तरीका ऐसा होना चाहिए जिससे समाज को लाभ हो, न कि नुकसान। इस्लाम में ब्याज-आधारित लेन-देन पूरी तरह से निषिद्ध है, क्योंकि यह आर्थिक अन्याय को बढ़ावा देता है। जुए, लॉटरी, या किसी भी प्रकार के सट्टे से होने वाली आय हराम है। शराब, ड्रग्स, या किसी भी निषिद्ध (हराम) वस्तु के उत्पादन या व्यापार से होने वाली कमाई हराम है। चोरी, रिश्वत, गबन, या किसी भी अनुचित और अवैध तरीके से अर्जित धन हराम है। किसी का हक मारकर या अनुचित साधनों से धन अर्जित करना भी इस्लाम में मना है। इस्लाम हर मुसलमान को ईमानदारी से कड़ी मेहनत करने और अपनी आजीविका कमाने पर जोर देता है, साथ ही यह भी सुनिश्चित करता है कि आय के स्रोत नैतिक और वैध हो ताकि व्यक्तिगत और सामाजिक कल्याण सुनिश्चित हो सके।
कार्यशाला में नौशीन फातिमा, शबनम, नूर सबा, शीरीन सिराज, अफसाना, शिफा खातून, फिजा खातून, सना फातिमा, असगरी खातून, यासमीन, आयशा, फरहत, नाजिया, तानिया अख्तर, अख्तरून निसा, अलीशा खातून, सादिया नूर, खुशी नूर, मनतशा, रूमी, शीरीन बानो, समीना बानो, शबाना, सिदरा, सानिया, उम्मे ऐमन, शीरीन आसिफ, सना खातून, आरजू अर्जुमंद, गुल अफ्शा, अदीबा, फरहीन, आफरीन सहित तमाम इस्लामी बहनें मौजूद रहीं।
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