हज़रत फातिमा ज़हरा को शिद्दत से किया गया याद।
सैय्यद फरहान अहमद
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।
मस्जिदों में चल रहे दर्स में रमज़ान के फजाइल के साथ हज़रत सैयदा फातिमा ज़हरा रदियल्लाहु अन्हा की ज़िंदगी पर रोशनी डाली गई। फातिहा ख्वानी हुई। मरकजी मदीना जामा मस्जिद रेती चौक में मुफ्ती मेराज अहमद कादरी कादरी व मकतब इस्लामियात तुर्कमानपुर में हाफिज सैफ अली इस्माईली ने बताया कि पैग़ंबरे इस्लाम हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बेटी, हज़रत अली की बीवी हज़रत सैयदा फातिमा ज़हरा रदियल्लाहु अन्हा का विसाल (निधन) 3 रमज़ानुल मुबारक को हुआ था। आपकी ज़िंदगी हम सभी खासकर औरतों के लिए ऐसी नज़ीर है, जिस पर अमल करते हुए अपनी ज़िंदगी को खूबसूरत बनाया जा सकता है। हज़रत फातिमा ने अपनी पूरी ज़िंदगी अल्लाह की इबादत में गुजार दी। वालिद, शौहर, बेटों के साथ उनका जो सुलूक रहा, वह आज भी एक नमूना-ए-हयात बना हुआ है। आपने जिस तरह ज़िंदगी गुजारी, बच्चों की परवरिश, पड़ोसियों का ख्याल रखा वह एक मिसाल है।
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