पांचवीं मोहर्रम के ऐतिहासिक शाही जुलूस का गर्मजोशी से भव्य स्वागत किया गया।
सेराज अहमद कुरैशी
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व महानगर सचिव आफताब अहमद के नेतृत्व में बक्शीपुर चौराहे पर पांचवीं मोहर्रम के ऐतिहासिक शाही जुलूस का भव्य, जोरदार एवं गर्मजोशी से स्वागत किया गया। इस अवसर पर पूरे क्षेत्र में अकीदत, भाईचारे और गंगा-जमुनी तहजीब का अद्भुत नजारा देखने को मिला।
कार्यक्रम के दौरान छोटे मियां साहब सैय्यद अयान अली शाह ने सफेद कबूतर उड़ाकर अमन, प्रेम, आपसी सद्भाव, सम्मान और विश्व शांति का संदेश दिया। सफेद कबूतर शांति, भाईचारे और इंसानियत का प्रतीक माना जाता है। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने छोटे मियां साहब को फूल-मालाएं पहनाकर उनका जोरदार स्वागत एवं अभिनंदन किया।
इसके उपरांत इमामबाड़ा स्टेट से पांचवीं मोहर्रम का शाही जुलूस पुरानी रवायत के मुताबिक पूरे शानो-शौकत, अनुशासन और अकीदत के साथ निकाला गया। जुलूस की अगुवाई सबसे आगे इमामबाड़ा स्टेट के परचम ने की, जिसके पीछे सफेद और आसमानी वर्दी में मियां साहब के पर्सनल सिक्योरिटी गार्ड अनुशासित कतारों में चलते दिखाई दिए। शाही बैंड, शहनाई वादकों, निजी सैनिकों तथा घुड़सवारों की आकर्षक प्रस्तुतियों ने जुलूस की भव्यता में चार चांद लगा दिए।
इस वर्ष पहली बार छोटे मियां साहब सैय्यद अयान अली शाह सफेद चमचमाती पैरहन में शाही जुलूस की अगुवाई करते नजर आए, जिन्हें देखने के लिए लोगों में विशेष उत्साह दिखाई दिया। जिन-जिन मार्गों से शाही जुलूस गुजरा, वहां सुबह से ही श्रद्धालुओं और नागरिकों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। सड़कों के दोनों किनारों, मकानों की छतों और बालकनियों पर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की भारी भीड़ छोटे मियां साहब की एक झलक पाने के लिए उत्सुक दिखाई दी।
पूरे मार्ग में जगह-जगह लोगों ने शाही जुलूस का स्वागत किया और मोहर्रम की परंपराओं, आपसी प्रेम, भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। अकीदत, अनुशासन और जनसहभागिता से परिपूर्ण यह ऐतिहासिक शाही जुलूस गोरखपुर की समृद्ध सांस्कृतिक एवं धार्मिक विरासत का जीवंत प्रतीक बन गया।
इस अवसर पर खालिद अली सोनू, रियाज अहमद, शाहिद अली, मोहम्मद शाहबाज, मोहम्मद अकमल, मोहम्मद नदीम, गोलू यादव, शकील अहमद, अनवर हुसैन, नसीब उल्ला खान, गुलाब अली खान, मुख्तार अहमद, मुन्ना भाई, आफताब अहमद सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।