Tranding
Mon, 04 May 2026 10:58 AM
धार्मिक / May 03, 2026

मन रमा तो हो गए ज्ञान गिरी संत।

पहलवानी किसानी फिर बैरागी संत।

परिवार में पत्नी बेटे-बहू पौत्र पौत्री से मोह-माया की त्याग ।

भगवन्त यादव 

कुशीनगर, उत्तर प्रदेश।

इंसान का जीवन संघर्षों से गुजरना तो आम बात है लेकिन जब कोई इंसान भरा-पूरा परिवार जनों माता पिता पत्नी बेटा-बेटी बहू पौत्र पौत्री के मोह माया जाल को त्याग कर संत सन्यासी जीवनशैली में बदलाव कर लेता है वह साधारण बात नहीं है ऐसे में काम क्रोध मद लोभ को छोड़ कर ज्ञान गिरी संत जो कुशीनगर के कसया तहसील के गांव टेकुआटार में स्थित भगवान शिव जी व हनुमान जी के प्राचीन काल के मंदिर के पुजारी हैं इन्होने संबाददाता से बातचीत में बताया कि 35साल से मैं बैरागी संत सन्यासी जीवनशैली व्यतीत कर रहा हूं यह मेरे गूरू बिभूति गिरीजी का आशीर्वाद है उनके मार्गदर्शन प्रेरणा से मेरे जीवन में परिवर्तन आ गया उन्होंने बताया कि मेरा नाम रामजीत था अब ज्ञान गिरी है जो मेरे गूरू जी ने नामकरण किया है पहले मैं पहलवानी और किसानी करता था मेरे माता-पिता का असीम कृपा रही कि मैं अध्यात्म के जीवन भगवान शिव जी के कृपा से इस मंदिर में पूजारी हूं ज्ञान गिरी संत ने बताया कि यहां दर्शन करने आये श्रद्धालु जो भी मन्नतें मांगते हैं वह पूरी होती है मंदिर परिसर में सैकड़ों बर्ष से समाधी स्थल भी बना हुआ है

मंदिर में हर साल संत सन्यासी समागम भजन भण्डारा भी होता है

Jr. Seraj Ahmad Quraishi
1

Leave a comment

logo

Follow Us:

Flickr Photos

© Copyright All rights reserved by Bebaak Sahafi 2026. SiteMap