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धार्मिक / Mar 15, 2026

लंदन में ‘वॉयसेज़ ऑफ फेथ’ संवाद में सूफी विचारों की गूंज, हाजी सैयद सलमान चिश्ती ने दिया आध्यात्मिक संदेश।

भारत समाचार न्यूज एजेंसी

गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।

लंदन के प्रतिष्ठित Barbican Centre में आयोजित अंतरराष्ट्रीय Voices of Faith Dialogue कार्यक्रम में अजमेर शरीफ दरगाह के गद्दीनशीन और Chishty Foundation के चेयरमैन Haji Syed Salman Chishty ने सूफी मत और आत्म-साक्षात्कार की आध्यात्मिक यात्रा पर वैश्विक श्रोताओं को संबोधित किया।

यह कार्यक्रम Teamwork Arts और Kamini and Vindi Banga Family Trust के सहयोग से आयोजित किया गया, जिसमें दुनिया भर के प्रतिष्ठित चिंतक, आध्यात्मिक नेता, विद्वान और सांस्कृतिक हस्तियां शामिल हुईं। कार्यक्रम का संचालन प्रसिद्ध प्रसारक Georgina Godwin के साथ संवाद के रूप में हुआ।

इस अवसर पर अपने संबोधन में हाजी सैयद सलमान चिश्ती ने कहा कि सूफी मत का मूल संदेश आत्मा से परमात्मा की यात्रा है। उन्होंने कहा कि जब इंसान अपने अंदर की सच्चाई को पहचान लेता है, तब धर्म, जाति और राष्ट्र की सीमाएं स्वतः समाप्त हो जाती हैं और मानवता, सेवा तथा करुणा ही सबसे बड़ा धर्म बन जाता है।

उन्होंने कहा कि आज के दौर में जब दुनिया कई तरह के तनाव और सामाजिक विभाजन से गुजर रही है, ऐसे समय में आध्यात्मिक संवाद और अंतरधार्मिक सहयोग शांति, सद्भाव और नैतिक जिम्मेदारी को मजबूत करने के लिए बेहद जरूरी है।

हाजी सैयद सलमान चिश्ती ने अजमेर शरीफ के महान सूफी संत Khwaja Moinuddin Hasan Chishti (गरीब नवाज़) की शिक्षाओं का जिक्र करते हुए कहा कि उनका सार्वभौमिक संदेश आज भी पूरी दुनिया को प्रेरित कर रहा है— “सबसे प्रेम करो, किसी से द्वेष मत करो।”

इस कार्यक्रम में Sir Trevor Phillips, Marcus du Sautoy, Justice Rohinton F. Nariman, Rabbi Jonathan Romain, Rabbi Deborah Kahn‑Harris, Lama Khyimsa Rinpoche सहित कई अंतरराष्ट्रीय वक्ताओं ने भी अपने विचार साझा किए।

इधर गोरखपुर में दरगाह मुबारक खां शहीद के अध्यक्ष इकरार अहमद ने इस कार्यक्रम को सूफी परंपरा और इंसानियत के संदेश को वैश्विक मंच तक पहुंचाने वाला महत्वपूर्ण प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि अजमेर शरीफ की चिश्ती परंपरा हमेशा से प्रेम, भाईचारा और मानव सेवा की राह दिखाती रही है।

इकरार अहमद ने कहा कि आज के दौर में दुनिया को सूफी संतों की शिक्षाओं की पहले से ज्यादा जरूरत है, क्योंकि यह परंपरा इंसान को आपसी नफरत से ऊपर उठकर शांति, सहिष्णुता और एकता का रास्ता दिखाती है।

कार्यक्रम के अंत में विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों के प्रतिनिधियों ने मानवता के बेहतर भविष्य के लिए आपसी समझ, सहयोग और करुणा को बढ़ावा देने का आह्वान किया।

Jr. Seraj Ahmad Quraishi
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