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धार्मिक / Jan 20, 2026

नहीं दिखा शाबान का चांद, शब-ए-बरात 3 फरवरी को।

सैय्यद फरहान अहमद

गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।

इस्लामी माह शाबान का चांद सोमवार को जिले व पूरे देश में नहीं नजर आया। लिहाजा बुधवार 21 जनवरी को माह-ए-शाबान की पहली तारीख है। शब-ए-बरात मंगलवार 3 फरवरी को अकीदत व एहतराम के साथ मनाई जाएगी। इस्लामी कैलेंडर के माह शाबान की 15वीं तारीख की रात को शब-ए-बरात के नाम से जाना जाता है। 

हाफिज रहमत अली निजामी ने बताया कि माह-ए-शाबान बहुत मुबारक महीना है। यह दीन-ए-इस्लाम का 8वां महीना है। इसके बाद माह-ए-रमजान आएगा। शब-ए-बरात के मौके पर महानगर की तमाम मस्जिदों, दरगाहों, कब्रिस्तानों की साफ-सफाई व सजावट होगी।

कारी मुहम्मद अनस रजवी ने बताया कि शब-ए-बरात का अर्थ होता है छुटकारे की रात या निजात की रात। इस्लाम धर्म में इस रात को महत्वपूर्ण माना जाता है। हदीस शरीफ में है कि इस रात में साल भर के होने वाले तमाम काम बांटे जाते हैं जैसे कौन पैदा होगा, कौन मरेगा, किसे कितनी रोजी मिलेगी आदि। सारी चीजें इसी रात को तक्सीम की जाती है। इस दिन शहर की छोटी से लेकर बड़ी मस्जिदों, घरों में लोग इबादत करते है। अल्लाह से दुआ मांगते हैं। कब्रिस्तानों में जाकर पूर्वजों की कब्रों पर फातिहा पढ़कर उनकी बख्शिश की दुआ करते हैं। वलियों की दरगाहों पर जियारत के लिए जाते हैं। गरीबों को खाना खिलाया जाता है।

मौलाना महमूद रजा कादरी ने बताया कि इस दिन घरों में तमाम तरह का हलवा (सूजी, चने की दाल, गरी आदि) व लजीज पकवान पकाया जाता है। देर रात तक लोग कजा नमाज, नफ्ल नमाज व कुरआन पाक की तिलावत कर अपना मुकद्दर संवारने की दुआ मांगते हैं। अगले दिन रोजा रखकर इबादत करते हैं। इस रात के ठीक पन्द्रह या चौदह दिन बाद मुकद्दस रमजान माह आता है। उन्होंने नौजवानों से आतिशबाजी, बाइक स्टंट और खुराफाती बातों से बचने का आह्वान किया है। उन्होंने अपील की है कि जिनकी फर्ज नमाजें कजा (छूटी) हों वह नफ्ल नमाजों की जगह फर्ज कजा नमाज पढ़ें।

Jr. Seraj Ahmad Quraishi
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