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धार्मिक / Dec 22, 2025

इस्लाम में रंग, नस्ल या भाषा के आधार पर कोई भेदभाव नहीं - हाफिज रहमत अली

इस्लामी बहनों की विशेष कार्यशाला 

सैय्यद फरहान अहमद

गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।

मदरसा रजा-ए-मुस्तफा तुर्कमानपुर व जामिया अल इस्लाह एकेडमी नौरंगाबाद, गोरखनाथ में इस्लामी बहनों की विशेष कार्यशाला हुई। कार्यशाला के दसवें सप्ताह में समाज को बेहतर बनाने व साफ-सफाई का खास ख्याल रखने का तरीका बताया गया। जामिया अल इस्लाह एकेडमी में दरूद बॉक्स बनाने वाली जैनब नूर, अलीशा खातून, नुजहत खान, सिमरन परवीन, आयशा अजीज, फिजा खातून, कायनात खातून, सूफिया फलक, साहिबा खातून को पुरस्कृत किया गया।

मुख्य वक्ता हाफिज रहमत अली निजामी ने कहा कि इस्लाम अमीर-गरीब और जाति-पाति के भेदभाव के बिना बराबरी का हक देता है। इस्लाम में रंग, नस्ल या भाषा के आधार पर कोई भेदभाव नहीं। सभी इंसान अल्लाह के बंदे हैं। जब मुसलमान अल्लाह के बनाए सिद्धांतों पर चलता है तो वह आध्यात्मिक व सामाजिक रूप से सशक्त बनता है। कुरआन और सुन्नत के सिद्धांतों के अनुसार सामाजिक जीवन का संचालन बहुत जरूरी है। इस्लाम में सामाजिक बुराइयों को दूर कर बेहतर समाज बनाने पर जोर दिया गया है। अल्लाह के प्रति पूर्ण समर्पण और उसके आदेशों का पालन करने से व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में शांति आती है। इस्लामी समाज का आधार कुरआन और पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की शिक्षाएं हैं, जो पारिवारिक, आर्थिक और सामाजिक जीवन के लिए मार्गदर्शन प्रदान करती हैं। इस्लाम सभी के साथ न्याय, समानता और भाईचारे के संबंधों पर जोर देता है। वहीं हुकूक-उल-इबाद में माता-पिता की सेवा, पड़ोसियों के हक, यतीमों की देखभाल और मेहमानों का सम्मान करना शामिल है।

संचालन करते हुए कारी मुहम्मद अनस रजवी ने कहा कि इस्लाम में सफाई का बहुत महत्व है। सफाई ईमान का एक जरूरी हिस्सा है। पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया है कि सफाई (पाकी) ईमान का आधा हिस्सा है। इस्लाम में इबादत (जैसे नमाज) के लिए शरीर का पाक होना जरूरी है। इसके लिए वुजू और गुस्ल का प्रावधान है। केवल शरीर ही नहीं, बल्कि पहनने वाले कपड़े और जहां नमाज पढ़ी जाए, उस जगह का भी पाक-साफ होना जरूरी है। वहीं इस्लाम में अपने आस-पास के वातावरण और घर को साफ रखने का भी हुकुम है। बाहरी सफाई के साथ-साथ इस्लाम मन और रूह की सफाई यानी बुरे विचारों और पापों से दूर रहने पर भी जोर देता है। इस्लाम में सफाई केवल एक अच्छी आदत नहीं बल्कि एक धार्मिक कर्तव्य है जो जन्नत में दाखिले के लिए महत्वपूर्ण है। सफाई एक इबादत है जो व्यक्ति के जिस्म व रूह को पाक रखती है, जिससे अल्लाह की नजर में इंसान की अहमियत बढ़ती है।

कार्यशाला में ज्या वारसी, आस्मां खातून, शबनम, नूर सबा, शीरीन सिराज, अफसाना, शिफा खातून, फिजा खातून, नौशीन फातिमा, सना फातिमा, असगरी खातून, यासमीन, आयशा, फरहत, नाजिया, तानिया अख्तर, अख्तरून निसा, अलीशा खातून, सादिया नूर, खुशी नूर, मनतशा, रूमी, शीरीन बानो, समीना बानो, शबाना, सिदरा, सानिया, उम्मे ऐमन, शीरीन आसिफ, सना खातून, आरजू अर्जुमंद, गुल अफ्शा, अदीबा, फरहीन, आफरीन सहित तमाम इस्लामी बहनें मौजूद रहीं।

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Jr. Seraj Ahmad Quraishi
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