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धार्मिक / Apr 16, 2023

रोजेदारों के चेहरे पर चमक रहा तकवा व परहेजगारी का नूर।

सैय्यद फरहान अहमद 

गोरखपुर, उत्तर प्रदेश। 

माह-ए-रमज़ान का 24वां रोजा रोजेदारों ने सब्र व शुक्र के साथ गुजारा। तेज धूप रोजेदारों के हौसलों के आगे पस्त है। बड़़े तो बड़े बच्चे भी रोजा रखकर इबादत में मशरूफ हैं। मस्जिदें नमाजियों से आबाद है। घर पर भी इबादत का दौर जारी है। नमाजों के साथ कुरआन-ए-पाक की तिलावत हो रही है। दरूदो सलाम पढ़ा जा रहा है। शाम को दस्तरख्वान पर तमाम तरह की खाने, शर्बत रोजेदारों का इस्तकबाल करते नजर आ रहे हैं। हदीस शरीफ के मुताबिक रोजेदार के लिए दरिया की मछलियां भी दुआ करती हैं। सहरी व इफ्तारी के समय नूरानी समा चारों तरफ नज़र आ रहा है। मस्जिदों में रमज़ान का विशेष दर्स व एतिकाफ की इबादत जारी है। रोजेदारों के चेहरे पर तकवा व परेहजगारी का नूर चमक रहा है। शबे कद्र की तीसरी ताक रात में खूब इबादत कर अल्लाह से दुआएं मांगी गईं।

सुब्हानिया जामा मस्जिद तकिया कवलदह के इमाम मौलाना जहांगीर अहमद अजीजी ने कहा कि अल्लाह के पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया, जो शख्स झूठ और गुनाह के काम न छोड़े, अल्लाह तआला को कोई जरूरत नहीं कि वह अपना खाना-पीना छोड़े। रोजे का सामाजिक महत्व भी है। यह समाज के खुशहाल तबके के लोगों को गरीबों की परेशानी का अनुभव कराता है। रमज़ान के महीने में कसरत से नफ्ल नमाज पढ़ना, कुरआन की तिलावत करना, अल्लाह की हम्द बयान करना, दरूदो-सलाम पढ़ने में मशगूल रहना, फिर दिनभर रोजा रखने के बाद रोजा इफ्तार करना, रोजेदार की नफ्स परस्ती वाली शख्सियत को मिटाकर उसमें इंसानियत को भर देती है।

बेनीगंज ईदगाह रोड मस्जिद के इमाम कारी मो. शाबान बरकाती ने कहा कि कुरआन जिस महीने में नाजिल हुआ, वह रमज़ान का महीना था। यही वह पाक किताब है, जिसे कयामत तक अल्लाह की हिफाजत हासिल है, जो इंसानों को अपनी मंजिल जन्नत तक पहुंचने का रास्ता दिखाती है।

गौसिया जामा मस्जिद छोटे काजीपुर के इमाम मौलाना मोहम्मद अहमद निजामी ने बताया कि जिस तरह अंग्रेजी महीने जनवरी, फरवरी, मार्च आदि होते हैं, उसी तरह मोर्हरम, सफर, रबीउल अव्वल, रबीउल आखिर, जमादिल अव्वल, जमादिल आखिर, रजब, शाबान, रमज़ान, शव्वाल, जिलकादा, जिलहिज्जा के रूप में बारह इस्लामी महीने होते हैं। माह-ए-रमज़ान के रोजे में अल्लाह का खौफ, उसकी वफादारी, मोहब्बत तथा सब्र का जज्बा हमें इंसानियत और इंसानी दर्द को पहचानने की सीख देता है। 

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Jr. Seraj Ahmad Quraishi
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