दलित बस्ती में "हर घर नल का जल" योजना टाएं टाएं फिश, बूंद बूंद हेतु त्रस्त
शहाबुद्दीन अहमद
बेतिया, बिहार
"हर घर नल का जल" का महत्वाकांक्षी योजना "टायें टाएं फिश" होती नजर आ रही है,ग्रामीण बूंद बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं,क्षेत्र में त्राहिमान की स्थिति बन गई है,इस भीषण गर्मी में लोग पानी के लिए मोहताज हैं।
संवाददाता को पता चला है कि बाल्मीकिनगर पंचायत क्षेत्र के कास्टभंडार गांव में, हर घर नल का जल योजना की हकीकत बेहद ही चिंताजनक रूप में सामने आ रही है। सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत हर घर तक पानी पहुंचाने का दावा किया गया था,लेकिन वार्ड संख्या 15 की दलित बस्ती में पिछले एक महीने से नल पूरी तरह सूखे पड़े हुए हैं ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, ग्रामीण गोविंद कुमार,सूरज कुमार,नथुनी कुमार,प्रेम कुमार शाह,अंजली देवी, रूपाली देवी,रेखा देवी इत्यादि ग्रामीणों ने संवाददाता को बताया कि गर्मी की शुरुआत होते ही जल संकट गहरा गया है,नल लगने के बावजूद पानी नहीं आने से लोग दूर गांव के हैंडपंपों,जल स्रोतों पर निर्भर हो गए हैं।सुबह होते ही पानी भरने के लिए लोगों की भीड़ लग जाती है,जिससे उनकी दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित हो रही है। विशेष रूप से मजदूर वर्ग की महिलाओं की स्थिति कठिन हो गई है,उन्हें रोजाना मजदूरी पर जाने से पहले घंटे भर पानी की व्यवस्था करनी पड़ती है,कई महिलाओ संवाददाता को बताया किअगर समय पर पानी नहीं भर पाती हैं तो उन्हें कम पर असर पड़ रहा है ग्रामीणों के अनुसार इस समस्या के मुख्य वजह लो वोल्टेज है,जिसके कारण मोटर सही तरीके से काम नहीं कर पा रही है,ग्रामीणों ने इस समस्या की जानकारी संबंधित विभाग को कई बार दे चुकें है,मगर इस पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।स्थिति की गंभीर बताते हुए ग्रामीणों का कहना है कि गांव के कई हैंडपंप भी जवाब देने लगे हैं,गर्मी बढ़ने के साथ ही जलस्तर नीचे चला गया है, जिससे वहां भी पूरा पानी नहीं मिल पा रहा है,ऐसे में ग्रामीणों के सामने पेयजल का संकट गहराता नजर आ रहा है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जल्द से जल्द समस्या का समाधान करने की मांग की है,उनका कहना है कि अगर समय रहते जल आपूर्ति बहाल नहीं की गई तोआने वाले दिनों में स्थिति भयावह हो सकती है," हर घर नल का जल योजना" का उद्देश्य लोगों के घर-घर स्वच्छ पेयजल,उपलब्ध करना था, लेकिन कास्ट भंडार गांव में यह योजना फिलहाल दम तोड़ती नजर आ रही है,अब देखना यह होगा कि प्रशासन कब तक इस गंभीर समस्या पर ध्यान देती है,जिससे ग्रामीणों को राहत मिल सके।