Sat, 13 Jun 2026 12:12 AM

अल्लामा इक़बाल करते थे क़ाज़ी तलम्मुज़ हुसैन की तारीफ़- महबूब सईद हारिस

प्रसिद्ध साहित्यकार और अनुवादक क़ाज़ी तलम्मुज़ हुसैन की पुण्यतिथि पर साहित्य गोष्ठी का आयोजन।

गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।

भारतीय उपमहाद्वीप के प्रख्यात साहित्यकार एवं अनुवादक क़ाज़ी तलम्मुज़ हुसैन की पुण्यतिथि पर साजिद अली मेमोरियल कमेटी गोरखपुर के तत्वाधान में एक साहित्यिक गोष्ठी का आयोजन घासी कटरा स्थित हामिद अली हाल, आग़ोश ए हमीदिया ,गोरखपुर में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ.दरख़्शां ताजवर ने किया जबकि मुख्य अतिथि के रूप में ज़मीर अहमद प्याम     उपस्थित रहे।

 कार्यक्रम को संबोधित करते हुए साजिद अली मेमोरियल कमेटी के सचिव और कार्यक्रम के संयोजक महबूब सईद "हारिस" ने बताया कि

क़ाज़ी तलम्मुज़ हुसैन हिंदुस्तान के एक जाने-माने अनुवादक और शोधकर्ता थे। उनके अनुवाद कार्य का सबसे अहम पहलू दर्शन, इतिहास और साहित्य का अनुवाद था।

महबूब सईद "हारिस" ने बताया कि वे हैदराबाद के 'दार-उल-तर्जुमा उस्मानिया' से जुड़े थे और उन्होंने राजनीति विज्ञान और इतिहास पर कई किताबों को उर्दू का रूप दिया। उन्होंने उर्दू बोलने वाले वर्ग तक पश्चिम के राजनीतिक और ऐतिहासिक विचारों को पहुँचाया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही डॉ.दरख़्शां       ने अपने संबोधन में कहा कि क़ाज़ी तलम्मुज़ हुसैन के अनुवादों की सबसे बड़ी खूबी यह है कि आप मुश्किल और नीरस वैज्ञानिक शब्दों को भी आम समझ में आने वाली और सहज उर्दू में ढाल देते हैं। वैज्ञानिक और विद्वतापूर्ण होने के बावजूद, आपकी लेखन शैली पाठक को ऊबने नहीं देती।

 कार्यक्रम का संचालन कर रहे मोहम्मद फर्रूख़ जमाल ने बताया कि क़ाज़ी तलम्मुज़ हुसैन ने राजनीति और इतिहास पर लगभग 19 किताबों का अनुवाद किया, जिनमें 'गवर्नमेंट्स ऑफ़ यूरोप' और 'हिस्ट्री ऑफ़ द इंग्लिश' प्रमुख हैं...

कार्यक्रम को संबोधित कर रहे डॉ. मोहम्मद अशरफ ने बताया कि उन्होंने बताया कि रियाज खै़राबादी, मजनू गोरखपुरी, फ़िराक़ गोरखपुरी के साथ कई क़ाज़ी तलम्मुज़ हुसैन साहब ने भी गोरखपुर का नाम साहित्य की दुनिया में रोशन किया। उन्होंने बताया कि क़ाज़ी तलम्मुज़ हुसैन का असल मैदान पत्रकारिता था लेकिन उन्होंने सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर भी खुलकर लिखो।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार ज़मीर अहमद ने कहा कि क़ाज़ी तलम्मुज़ हुसैन की शख्सियत बहुत बड़ी है । फ़िराक़ गोरखपुरी और मजनू गोरखपुरी को जो शोहरत मिली वह क़ाज़ी तलम्मुज़ हुसैन के हिस्से में नहीं आई

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. मोहम्मद अज़ीम फारूक़ी में बताया कि क़ाज़ी तलम्मुज़ हुसैन ने तर्जुमा के साथ एक नई बुलंदी पर पहुंचा दिया। उन्होंने बताया कि क़ाज़ी तलम्मुज़ हुसैन ने अपना पूरा जीवन साहित्य की सेवा में गुज़ार दिया। उन्होंने उर्दू के मशहूर शायर रियाज़ खै़राबादी का काव्य संग्रहण को भी इकट्ठा किया।

डा सलमा बानो, डॉक्टर ज़ेबा खातून, तरन्नुम हसन, मोहम्मद इफराहिम जब रफी अहमद खान मोहम्मद अनवर जिया आदि उपस्थित रहे।

Jr. Seraj Ahmad Quraishi
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