पी डी ए के 'मास्टरस्ट्रोक' से हिला यूपी का सियासी गणित; 2027 में सपा की प्रचंड जीत का दावा-अशफ़ाक मेकरानी
भारत समाचार न्यूज एजेंसी
गोरखपुर उत्तर प्रदेश।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा दिए गए पी डी ए (पिछड़ा,दलित,अल्पसंख्यक)के नारे ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नई लकीर खींच दी है।लोकसभा चुनाव में सपा के 37 सांसदों के जातिवार आंकड़ों ने यह साबित कर दिया है कि अब समाजवादी पार्टी केवल एक या दो समुदायों तक सीमित नहीं, बल्कि'सर्व समाज' की पार्टी बन चुकी है।सपा नेता अशफ़ाक हुसैन मेकरानी ने पार्टी के सांसदों का विस्तृत जातिवार ब्यौरा पेश करते हुए विरोधियों पर तीखा हमला बोला है।उन्होंने कहा कि आज जब पीडीए की एकता धरातल पर दिख रही है,तो विपक्षी दल अपनी जमीन खिसकती देख बिलबिला' उठे हैं।विविधता का नया चेहरा:37 सांसदों का सामाजिक ढांचा मेकरानी द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार,सपा के संसदीय दल में हर वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित की गई है:पिछड़ा वर्ग:कुर्मी(7)यादव (5),कोइरी/कुशवाहा/मौर्य (3),निषाद (2),लोधी (1)राजभर (1)और जाट (1)दलित एवं जनजातीय वर्ग: पासी (5),जाटव (1),अहिरवार (1)और खरवार-ST(1)अल्पसंख्यक:मुस्लिम (4)सामान्य वर्ग ठाकुर (2),ब्राह्मण (1),भूमिहार (1) और बनिया (1)2027 में भाजपा का सफाया तय अशफ़ाक हुसैन मेकरानी ने कहा कि मीडिया के एक धड़े ने इस बदलाव को नजरअंदाज किया कि किस तरह यादव और मुस्लिम समाज से ज्यादा पासी और कुर्मी समाज के प्रतिनिधि चुनकर आए हैं।उन्होंने हुंकार भरते हुए कहा,माननीय अखिलेश यादव जी के नेतृत्व में समाजवादी सिपाही एकजुट हैं।सर्व धर्म और सर्व समाज आज भाजपा की नीतियों से त्रस्त है। 2027 के विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की जनता भाजपा को उखाड़ फेंकेगी और सपा की सरकार बनना अब निश्चित है।मेकरानी ने आगे कहा कि पीडीए परिवार की यह एकता केवल चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश में सामाजिक न्याय की नई सुबह का आगाज है।