संविधान, धार्मिक स्वतंत्रता और नारी सम्मान पर सीधा प्रहार — सूफ़ी सैफुल्लाह क़ादरी
मुख्यमंत्री की मर्यादा पर सवाल: मुस्लिम महिला का नक़ाब हटाने का वीडियो वायरल।
जयपुर, राजस्थान।
सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से जुड़ा ऐसा दृश्य सामने आया है, जिसने सार्वजनिक जीवन में संवैधानिक मर्यादा और महिला सम्मान को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में एक मुस्लिम महिला के चेहरे से कथित तौर पर नक़ाब हटाए जाने का मामला, सामने आने के बाद प्रतिक्रियाओं का दौर तेज़ हो गया है।
ग़ौसे आज़म फाउंडेशन के चेयरमैन व चीफ़ क़ाज़ी, हज़रत मौलाना सूफ़ी सैफुल्लाह क़ादरी ने इस घटना को “संवैधानिक पद की गरिमा के ख़िलाफ़ और महिला की व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर सीधा हस्तक्षेप” बताया। उन्होंने कहा कि किसी महिला के पहनावे में दख़ल देना, वह भी सार्वजनिक मंच पर, निजता के अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता और सम्मानपूर्वक जीवन के अधिकार का स्पष्ट उल्लंघन है।
सूफ़ी सैफुल्लाह क़ादरी ने कहा कि यह मामला किसी धर्म या समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक आचरण और संवैधानिक सीमाओं से जुड़ा हुआ है। “सत्ता में बैठे व्यक्ति को यह अधिकार नहीं है कि वह किसी महिला के कपड़ों या धार्मिक पहचान में हस्तक्षेप करे। लोकतंत्र में सरकार का काम अधिकारों की रक्षा करना है, नियंत्रण थोपना नहीं,”। उन्होंने स्पष्ट किया कि नक़ाब या पर्दा किसी प्रकार की जबरन थोपी गई व्यवस्था नहीं, बल्कि लाखों महिलाओं के लिए यह उनकी आस्था, पहचान और व्यक्तिगत पसंद का हिस्सा है, जिसे भारतीय संविधान पूर्ण संरक्षण देता है। उन्होंने इस घटना को सत्ता के दंभ और पितृसत्तात्मक सोच का प्रतिबिंब बताते हुए कहा कि यदि ऐसे मामलों को सामान्य मान लिया गया, तो यह भविष्य में महिलाओं की स्वतंत्रता के लिए एक ख़तरनाक उदाहरण बन सकता है।
*सूफ़ी सैफुल्लाह क़ादरी ने मांग की*
पूरे प्रकरण पर तथ्यात्मक और निष्पक्ष स्पष्टीकरण सामने आए। मुख्यमंत्री स्तर पर सार्वजनिक जवाबदेही तय हो और यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी महिला के सम्मान, आस्था और निजी निर्णय में आगे ऐसा हस्तक्षेप न हो।
अंत में उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल एक महिला या एक समुदाय का नहीं, बल्कि हर उस नागरिक के अधिकारों से जुड़ा है जो गरिमा, स्वतंत्रता और संविधान के साथ जीना चाहता है।