Tranding
Sat, 28 Feb 2026 11:27 AM
धार्मिक / Dec 14, 2025

इस्लाम धर्म के पहले खलीफा हजरत अबू बकर का मनाया गया उर्स, बांटा लंगर।

पैगंबरों के बाद हजरत अबू बकर इंसानों में सबसे अफजल - मुफ्तिया गाजिया 

सैय्यद फरहान अहमद

गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।

इस्लाम धर्म के पहले खलीफा अमीरुल मोमिनीन हजरत सैयदना अबू बकर रदियल्लाहु अन्हु का उर्स-ए-मुबारक मुस्लिम घरों, खूनीपुर, मकतब इस्लामियात तुर्कमानपुर में अकीदत के साथ मनाया गया। फातिहा ख्वानी हुई। अल मुस्तफा कमेटी के मुहम्मद शुएब, मुहम्मद सदफ, मुहम्मद आमिर, अयान सिद्दीकी, अनस, हसीब, अहमद बेलाल , नदीम कादरी, मोईन की ओर से खूनीपुर में लंगर बांटा गया। गौसे आजम फाउंडेशन के जिलाध्यक्ष समीर अली, अमान अहमद, मुहम्मद जैद कादरी, सैफ अली, तनवीर अहमद ने अबू बाजार उंचवा में फातिहा ख्वानी की।

मकतब इस्लामियात में महिलाओं की 27वीं महाना संगोष्ठी के दौरान मुख्य अतिथि मुफ्तिया गाजिया खानम अमजदी ने कहा कि हजरत अबू बकर रदियल्लाहु अन्हु सहाबा किराम बल्कि नबियों व रसूलों के बाद तमाम इंसानों में सबसे अफजल हैं। आप सबसे पहले ईमान लाने वाले, सहाबा किराम में सबसे ज्यादा नेकी करने वाले, सबसे ज्यादा सदका खैरात करने वाले, सबसे ज्यादा इल्म वाले और सबसे ज्यादा अल्लाह से डरने वाले हैं। आप इमामत व खिलाफत के साथ साथ हर मामले में पहले नंबर पर हैं। 

संचालन करते हुए शिफा खातून ने कहा कि कुरआन की कई आयतें हजरत अबू बकर की तारीफ में नाजिल हुई। हदीस पाक व हर दीनी किताब में आपकी फजीलत और तारीफ भरी पड़ी है। आप हर जंग, हर जाहिरी मुसीबत व हर हालात में पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ रहे। मक्का वालों के जुल्म व ज्यादती की वजह से जब पैगंबर-ए-इस्लाम ने मदीना की तरफ हिजरत (सफर) तब भी हजरत अबू बकर पैगंबर-ए-इस्लाम के साथ रहे। इसका जिक्र कुरआन में भी है। 

सना फातिमा ने कहा कि हजरत अबू बकर आप दस खुशनसीब सहाबा में से हैं जिन्हें अल्लाह के आखिरी नबी हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने दुनिया में ही जन्नत की खुशखबरी अता फरमाई है। आपकी नजर में न कोई ऊंचा था और न कोई नीचा। हजरत अबू बकर सबको समान दृष्टि से देखते थे। अल्लाह के रास्ते में आप दिल खोल कर खर्च करते थे। आपने बेशुमार गुलामों को खरीद कर आजाद किया। जिनमें पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के मुअज्जिन हजरत बिलाल भी शामिल हैं। हजरत अबू बकर की मेहनत से बेशुमार सहाबा किराम ने इस्लाम अपनाया। जिनमें हजरत उस्माने गनी, हजरत जुबैर, हजरत अब्दुर्रहमान, हजरत तल्हा और हजरत साद के नाम मुख्य रूप से लिए जाते हैं। हजरत अबू बकर ने पूरी जिंदगी इस्लाम का परचम बुलंद करने में लगा दी। आपकी साहबजादी हजरत आयशा से पैगंबर-ए-इस्लाम ने निकाह किया। पैगंबर-ए-इस्लाम के साथ आपने मदीना की तरफ हिजरत किया। कुरआन-ए-पाक की आयत में आपका जिक्र है। आपका 13 हिजरी में इंतकाल हुआ। हजरत आयशा के हुजरे में पैगंबर-ए-इस्लाम के पहलू में दफन हुए। आपकी उम्र तकरीबन 63 साल रही। मुसलमान मदीना जाकर आपकी बारगाह में अकीदत का सलाम जरूर पेश करते हैं।

कुरआन-ए-पाक की तिलावत फिजा खातून ने की। हम्द व नात सना फातिमा, फाइजा, खुशी, उमरा, अक्सा, गुल अफ्शा, सानिया ने पेश की। हदीस-ए-पाक आयशा व सादिया ने पेश की।‌ तकरीर फिजा, नूर व खुशी ने की। अंत में दरूद ओ सलाम पढ़कर मुल्क में अमन की दुआ मांगी गई। संगोष्ठी में ज्या वारसी, जिक्रा शेख, अख्तरुन निसा, शबाना खातून, रजिया, अस्गरी खातून, आस्मां खातून, किताबुन निसा, तस्मी, फलक, नूरी, नूर अज्का, आलिया, खुशी नूर, मुस्कान, तैबा नूर आदि मौजूद रहीं।

--------------

Jr. Seraj Ahmad Quraishi
26

Leave a comment

logo

Follow Us:

Flickr Photos

© Copyright All rights reserved by Bebaak Sahafi 2026. SiteMap