न दान पुण्य, न भोज, मात्र तीन दिनों में ही श्राद्ध कर्म सम्पन्न।
–शोकसभा में आत्मा पुनर्जन्म की मान्यता को नकारा।
रिपोर्ट: विनोद विरोधी
गया, बिहार।
जाने माने सेवानिवृत अभियंता और समाजसेवी ब्रह्मदेव प्रसाद की 70 वर्षीया पत्नी सुधा रानी के निधनोपरांत न तो कोई दान पुण्य हुआ और न ही ब्रह्म भोज, मात्र तीन दिनों में अर्जक संघ की पद्धति से शोक सभा करके श्राद्ध कर्म सम्पन्न हो गया। सभा में दो मिनट का मौन रखा गया। इस कार्यक्रम में उनके परिवार, सगे संबंधी, ग्रामीण , कई पत्रकार, राजनेता, समाजसेवी आदि शामिल हुए। इस तरह से किए गए कार्यक्रम पर क्षेत्र में चर्चा जोरों पर है।
स्मरणीय है कि मगध प्रमंडल के नवादा जिला अंतर्गत रोह प्रखंड के मानियोचक निवासी ब्रह्मदेव प्रसाद की पत्नी सुधा रानी पिछले तीन वर्षों से कैंसर से पीड़ित थीं और डाक्टर ने कह दिया था कि मात्र छह माह तक ही जीवित रह पाएंगी। परन्तु मृतक के पति, पुत्र,पुत्री, दामाद सभी ने मिलकर इतना सेवा की और इलाज करवाया कि साढ़े तीन वर्ष तक जीवित रही। अंततः 7 जून को कोलकाता में आखिरी सांस ली। तदोपरांत उन्हें नवादा के मिर्जापुर स्थित आवास पर लाया गया और यहीं अर्जक पद्धति से दाह संस्कार हुआ। पुत्री और पतोहू ने अरथी को कंधा और मुखाग्नि भी दिया। शवयात्रा में जीवन मरण सत्य है का नारा भी लगाया गया। जिसका नेतृत्व अर्जक नेता उपेन्द्र पथिक कर रहे थे।
इसके बाद अर्जक संघ की पद्धति से जिला संयोजक राम सहाय प्रसाद की अध्यक्षता में शोकसभा आयोजित की गई जिसमें वक्ताओं ने मृतक और उनके पति इंजी ब्रह्मदेव प्रसाद,पुत्र इंजी मनीष कुमार,इंजी नीतीश कुमार,पुत्री इनकी विदुषी भारती के परिवार और समाज में दिए गए योगदान की प्रशंसा की। समारोह का संचालन सांस्कृतिक समिति के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेन्द्र पथिक ने की ।इस क्रम में उन्होंने कहा कि आत्मा, पुनर्जन्म, स्वर्ग नरक, बैतरणी मृत्यु भोज आदि की मान्यता काल्पनिक और शोषण आधारित है। इसे नकारकर वैज्ञानिक सोच के आधार पर संस्कार करना ही श्रेयस्कर है। शोकसभा को अन्य अर्जकों के अलावा बैजनाथ प्रसाद, डॉ परमेश्वर मंडल, शिवनंदन प्रभाकर, भुवनेश्वर प्रसाद, शिवशंकर गोप, पत्रकार अविनाश निराला, सतीश कुमार, सुमित्रा देवी, विकास दीप,मनीष कुमार, राजेश रंजन, सुनील कुमार, रणजीत गुप्ता, दशरथ गुप्ता, प्रशांत प्रवेंदु, सौरभ सुमन, आदि ने संबोधित करते हुए अर्जक संघ द्वारा किये गए संस्कार की प्रशंसा की। गायक सुरेन्द्र प्रसाद ने अपने गीत के माध्यम से समाज में व्याप्त अंधविश्वास और कुरीतियों को मिटाकर मानववादी व्यवस्था लाने पर जोर दिया।