रमजान के अंतिम अशरे में इबादत का सिलसिला तेज।
सैय्यद फरहान अहमद
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।
माह-ए-रमजान का अंतिम अशरा चल रहा है। रविवार को 25वां रोजा मुकम्मल हो गया। चंद रोजे और बचे हुए हैं। माह-ए-रमजान रुखसत होने वाला है। ईद का त्योहार आने वाला है। ईद के लिए मुस्लिम घरों में तैयारियां तेज हैं। सेवईयों व सूखे मेवों की बिक्री बढ़ गई है। वहीं बाजार में ईद की जमकर खरीदारी हो रही है। इबादत का सिलसिला तेज है। तरावीह की नमाज पढ़ी जारी है। तिलावत-ए-कुरआन जारी है। एतिकाफ में बंदे खूब इबादत कर रहे हैं।
ईद अमीर-गरीब के बीच की खाई को पाटने में पुल का काम करती है : मुफ्ती अजहर शम्सी
शहर काजी मुफ्ती मुहम्मद अजहर शम्सी ने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया है कि यदि समाज का एक तबका अपनी जायज जरूरतों को पूरा नहीं कर पाता है तो आर्थिक रूप से सम्पन्न लोगों की यह जिम्मेदारी है कि वे उसे खुशहाल ज़िन्दगी बसर करने में मदद करें। यही अल्लाह के नेक बंदों का काम है। इस तरह ईद अमीर-गरीब के बीच की खाई को पाटने में पुल का काम करती है।
रमजान इंसान को इंसानियत के राह पर ले जाता है : मुफ्ती अख्तर हुसैन
मुफ्ती-ए-शहर अख्तर हुसैन मन्नानी ने कहा कि जरूरतमंद लोगों की ईद को खुशगवार बनाने के लिए मुसलमानों को सदका-ए-फित्र देने का हुक्म दिया गया है। यह उन्हीं लोगों को दिया जा सकता है जो जकात के हकदार हैं यानी गरीब, मजलूम और मिस्कीन मुसलमान। ईद की नमाज पढ़ने से पहले अनाज या पैसे की शक्ल में सदका-ए-फित्र निकाल देना चाहिए। अनाज के बजाए उसकी कीमत देना ज्यादा बेहतर है। रमजान हमें बताता है कि हर किसी के साथ मिलकर रहें, बुराइयों से बचें। सिर्फ भूखे प्यासे न रहें बल्कि हर गैर मुनासिब काम से बचने की कोशिश करें। मुक़द्दस रमजान वो है जो इंसान को इंसानियत के राह पर ले जाता है।
फिल्म देखने में खर्च की जाने वाली रकम गरीबों पर खर्च करें : नेहाल अहमद
समाजसेवी नेहाल अहमद ने कहा कि अक्सर देखने में आता है कि माह-ए-रमजान के खत्म होने के बाद सिनेमा हॉलों में मुस्लिम समाज से काफी नौजवान जुटते हैं। फिल्मों के टिकट की एडवांस बुकिंग करवाते हैं। इन सारे कामों की इजाजत इस्लाम धर्म नहीं देता है। इन सब खुराफातों से आप खुद भी बचें और अपने परिवार, पास-पड़ोस व दोस्तों को बचाएं। फिल्म देखने में खर्च की जाने वाली रकम गरीबों, यतीमों, बेवाओं, बेसहारों पर खर्च करें। रमजान आपको अल्लाह का फरमाबरदार बनाने के लिए आया है। फिल्में देखकर आप शैतान की फरमाबरदारी न करें।
औरतों पर ईद की नमाज वाजिब नहीं : उलमा किराम
रमजान हेल्पलाइन नंबर 8604887862, 9598348521, 9956971232, 7860799059 पर रविवार को सवाल ओ जवाब का सिलसिला जारी रहा।
1. सवाल : औरतों पर ईद की नमाज पढ़ने का क्या हुक्म है?
जवाब : ईद की नमाज मर्दों पर वाजिब है। औरतों पर ईद की नमाज वाजिब नहीं।
2. सवाल : क्या औरतें फातिहा दे सकती हैं?
जवाब : हां। इसमें कोई हर्ज नहीं।