किताबें बुला रही हैं' नाम से लगा दीनी किताबों का स्टॉल।
अंधेरे को दूर कर ज्ञान की रोशनी फैलाती हैं दीनी किताबें : मुजफ्फर हसनैन
सैय्यद फरहान अहमद
गोरखपुर।
इस माह-ए-रमजान अल कलम एसोसिएशन की ओर से 'किताबें बुला रही हैं' नाम से दीनी किताबों का स्टॉल लगाने की पहल की गई है। ताकि अवाम का ताल्लुक किताबों से मजबूत किया जा सके। इसी मकसद के तहत सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफरा बाजार में दीनी किताबों का स्टॉल लगाया गया। तरावीह नमाज के दौरान बड़ी संख्या में बच्चों व बड़ों ने दीनी किताबों के प्रति जबरदस्त उत्साह दिखाया। बच्चों को अवाम के सहयोग से मुफ्त किताबें भी उपलब्ध करवाई गई।
संयोजक मुजफ्फर हसनैन रूमी ने कहा कि दीनी किताबें आध्यात्मिक ज्ञान, नैतिकता, और जीवन जीने का सही तरीका सिखाती हैं। दीनी किताबों का महत्व केवल जानकारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इंसान के नैतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक जीवन की बुनियाद है। ये किताबें जीवन जीने का सही तरीका सिखाती हैं और मनुष्य को अल्लाह व रसूल के करीब लाती हैं। दीनी किताबें मनुष्य को उसके पैदा होने का मकसद बताती हैं। ये किताबें जीवन के हर मोड़ पर सही और गलत के बीच फर्क करना सिखाती हैं। इन किताबों के अध्ययन से इंसान के भीतर ईमानदारी, धैर्य, दया और क्षमा जैसे गुण पैदा होते हैं। यह व्यक्ति को बुराइयों से दूर रहकर एक आदर्श चरित्र बनाने में मदद करती हैं। दीनी किताबों का पाठ करना मन को शांति प्रदान करता है और तनाव को कम करता है। इनके संदेश इंसान को कठिन समय में सब्र और हिम्मत देते हैं। दीनी किताबें न केवल दुनिया में रहने का तरीका बताती हैं, बल्कि मृत्यु के बाद के जीवन (आखिरत) की तैयारी के लिए भी प्रेरित करती हैं। ये किताबें इतिहास, पूर्वजों के अनुभवों और महान महापुरुषों के जीवन से रूबरू कराती हैं, जिससे आने वाली पीढ़ियों को सही दिशा मिलती है। जिस तरह शरीर के लिए भोजन जरूरी है, उसी तरह आत्मा की खुराक के लिए दीनी किताबों का अध्ययन अनिवार्य है। यह अज्ञानता के अंधेरे को दूर कर ज्ञान की रोशनी फैलाती हैं। किताबों का स्टॉल सजाने में कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी, हाफिज रहमत अली निजामी, आसिफ महमूद, हस्सान, शाबान, अब्दुस्समद, सफियान, जीशान, जावेद, रूशान, शहनवाज आदि ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
रोजा रखने से गुनाह माफ होते हैं : कारी मुहम्मद अनस
मगफिरत यानी गुनाहों से माफी का अशरा चल रहा है। अल्लाह के बंदे इबादत कर रो-रो कर अपने गुनाहों की माफी मांग रहे हैं। अल्लाह के फजल व करम से 15वां रोजा खैर के साथ गुजर गया। अल्लाह के बंदे सदका, जकात व खैरात जरुरतमंदों तक पहुंचा रहे हैं। मस्जिदों में नमाजियों की कतारें नजर आ रही हैं। घरों में भी इबादत का दौर जारी है। मुकद्दस कुरआन-ए-पाक की तिलावत हो रही है। सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफरा बाजार में तरावीह नमाज के दौरान एक कुरआन-ए-पाक हाफिज रहमत अली निजामी ने मुकम्मल कर लिया। उन्हें तोहफों से नवाजा गया। नमाजियों का स्वागत गुलाब के फूलों से किया गया। वहीं हुसैनी जामा मस्जिद बड़गो में हाफिज आरिफ रजा व नूरी मस्जिद तुर्कमानपुर में कारी सफीउल्लाह ने तरावीह नमाज में एक कुरआन-ए-पाक मुकम्मल किया।
कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी ने कहा कि रमजान की फजीलतों की फेहरिस्त बहुत लम्बी है, मगर उसका बुनियादी सबक यह है कि हम सभी उस दर्द को समझें जिससे दुनिया की आबादी का एक बड़ा हिस्सा रोजाना दो-चार होता है। जब हमें खुद भूख लगती है तभी हमें गरीबों की भूख का एहसास हो सकता है। रमजान के महीने में ही कुरआन-ए-पाक दुनिया में उतरा था, लिहाजा इस महीने में तरावीह के रूप में कुरआन-ए-पाक सुनना बेहद सवाब का काम है।
हाफिज रहमत अली निजामी ने बताया कि रमजान का महीना हममें इतना तकवा (परहेजगारी) पैदा कर सकता है कि सिर्फ रमजान ही में नहीं बल्कि उसके बाद भी ग्यारह महीनों की जिन्दगी भी सही राह पर चल सके। पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का मशहूर फरमान है कि जिसने ईमान के साथ सवाब की नियत से यानी खालिस अल्लाह की खुशनूदी हासिल करने के लिए रोजा रखा उसके पिछले तमाम गुनाह माफ फरमा दिए जाते हैं।
एनीमा लगवाने से रोजा टूट जाता है : उलमा किराम
रमजान हेल्पलाइन नंबर 8604887862, 9598348521, 9956971232, 7860799059 पर गुरुवार को सवाल ओ जवाब का सिलसिला जारी रहा।
1. सवाल : नमाजे इशा से पहले तरावीह पढ़ना कैसा?
जवाब : इशा की फर्ज नमाज पढ़ने के बाद ही तरावीह का वक्त होता है बगैर फर्ज-ए-इशा पढ़े तरावीह पढ़ना दुरुस्त नहीं अगर किसी शख्स की नमाजे इशा छूट गई हो तो पहले इशा की फर्ज नमाज पढ़ ले फिर तरावीह में शरीक हो और आखिर में तरावीह की जो रकातें छूटी हों उन्हें खुद से पढ़ कर बीस रकातें पूरा कर ले।
2. सवाल : क्या एनीमा लगवाने से रोजा टूट जाता है?
जवाब : हां। एनीमा लगवाने से रोजा टूट जाता है।
3. सवाल : क्या रोजे की हालत में आंखों में लेंस लगवा सकते हैं?
जवाब : हां लगवा सकते हैं इससे रोजे पर कोई असर नहीं पड़ेगा।