दूसरों को नेक काम करने के लिए प्रेरित करें, बुराई से रोकें - अनस नक्शबंदी
चालीस हदीसों की विशेष कार्यशाला।
सैय्यद फरहान अहमद
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।
जाफरा बाजार में इस्लामी भाईयों के लिए चालीस हदीसों की विशेष कार्यशाला सब्जपोश हाउस मस्जिद में आयोजित की गई। कार्यशाला के दसवें सप्ताह में इल्म वालों की इज्जत करने और दूसरों तक नेकी व दीन की बातें पहुंचाने का तरीका बताया गया।
मुख्य वक्ता कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी ने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया है कि तुम में सबसे अच्छा वह है जिसके अख्लाक सबसे अच्छे हों। हर मुसलमान की जिम्मेदारी है कि वह दूसरों को नेक काम करने के लिए प्रेरित करे और बुराई से रोके। अगर आपका किरदार सच्चा, ईमानदार और मददगार है, तो लोग आपके दीन की तरफ खुद-ब-खुद आकर्षित होंगे। दीन की बात हमेशा प्यार और नरमी से कहें। किसी को दीन के बारे में बताने से पहले खुद सही इल्म हासिल करें। आज के दौर में आप सोशल मीडिया का इस्तेमाल नेक बातें फैलाने के लिए कर सकते हैं। एक सही हदीस या छोटी सी अच्छी नसीहत शेयर करना भी सदका-ए-जारिया है।
उन्होंने कहा कि इल्म सिर्फ किताबी जानकारी नहीं, बल्कि वह नूर है जो इंसान को सही और गलत में फर्क करना सिखाता है। एक आलिम (विद्वान) की इबादत एक आम इंसान की इबादत से कई गुना अधिक महत्व रखती है क्योंकि वह समझ के साथ की जाती है। इस्लाम में इल्म (ज्ञान) रखने वालों का मकाम बहुत बुलंद है। जब कोई इल्म वाला बात कर रहा हो, तो उसे खामोशी और ध्यान से सुनना चाहिए। उनसे सवाल हमेशा सीखनें की नियत से और विनम्रता के साथ करना चाहिए। जिस समाज में उस्तादों और विद्वानों की इज्जत नहीं होती, वहां से बरकत और तहजीब खत्म हो जाती है। आने वाली नस्लों को यह सिखाना जरूरी है कि कामयाबी का रास्ता बड़ों और इल्म वालों के सम्मान से होकर गुजरता है। इल्म वालों की इज्जत करना असल में उस इल्म की इज्जत करना है जो अल्लाह ने उन्हें अता किया है।
अंत में दरूद ओ सलाम पढ़कर मुल्क में अमन ओ अमान की दुआ मांगी गई। कार्यशाला में हाफिज रहमत अली निजामी, मुजफ्फर हसनैन रूमी, आसिफ महमूद, नेहाल अहमद, आसिफ, शहबाज सिद्दीकी, ताबिश सिद्दीकी, शीराज सिद्दीकी, महबूब आलम, मुहम्मद आजम, सैयद नदीम अहमद, याकूब, रूशान, जावेद, महबूब अहमद सहित तमाम लोग मौजूद रहे।