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Sat, 30 May 2026 06:40 AM

नगर का प्रसिद्ध फैन्सी मेला ग्राउंड बना ईट,बालू का मंडी।

शहाबुद्वीन अहमद

बेतिया,पश्चिमी चंपारण, बिहार।

शहर में स्थित बेतिया राज का राज कचहरी मैदान फैंसी मेला और दशहरा पूजा के लिए विगत कई वर्षों से प्रसिद्ध रहा है।आज यह ग्राउंड ईट व बालू के मंडी में तब्दील हो गया है। बेतिया महाराजा हरेंद्र किशोर‌ सिंह कभी सपनों में भी यह नहीं सोचे होंगे कि हमारे बेतिया रियासत की ऐसा दुर्दिन और बुरा हाल होगा।बेतिया महाराज का संग्रहालय,ओपन जिम‌ प्लेग्राउंड होना चाहिए, वहांआज ईट और बालू की मंडी तथा फुटपाथी होटलों का बसेरा हो बनकर रह गया है। बेतिया राज का हृदय स्थली कहलाने वाला राज कचहरी में जाने पर कहीं से ऐसा कुछ नहीं दिखता,जिससे प्रतित हो कि यहां बरसों पहले महाराजा हरेंद्र किशोर सिंह का कचहरी तथा बगीचे हुआ करता था, यहां बरसों से‌ दशहरा के मौके पर लगने वाला बेतिया फैंसी मेला और भवानी मंडप में दुर्गा की प्रतिमा अवश्य बनाई जाती है।आज स्थिति यह है कि यहां लगने वाला फैंसी मेला का ग्राउंड भी धीरे-धीरे सिमट रहा है।कतिपय लोगों द्वारा मेला परिसर को अतिक्रमित कर लिया गया है,जिससे यहां लगने वाला फैंसी मेला से बेतिया राज को प्रतिवर्ष करोड़ों रुपए का राजस्व प्राप्ति होता है,धीरे-धीरे इसका अस्तित्व खतरे में दिखाई पड़ रहा है।भारी भरकम राशि देने वाला बेतियाका यह फैंसी मेला लगाने में ठेकेदारों को घोर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।ठीकादारी लेने के बादअगर बारिश हो जानें पर हजारों रुपए खर्च करके पानी को निकाला जाता है,तभी जाकर दुकानदार यहां पर आकर दुकाने लगाते हैं। पर्याप्त जगह केअभाव में जन सरोकारों से जुड़ी सुविधाएं नहीं मिलने के चलते धीरे-धीरे यहां ‌लगने वाला फैंसी मेले में उदासीनता देखने को मिल रही है।मेले में आने वाले दुकानदारों से लेकर‌ दूर दराज के गांव से आने वाले लोगों में काफी उदासीनता व्याप्त है। पूर्व के सालों में मेला प्रारंभ होने से पहले जिला प्रशासन द्वारा मेले का उद्घाटन करवाया जाता था इस मौके पर सांस्कृतिक व अन्य कार्यक्रम भी होते थे, अस्थाई पुलिस कैम्प भी लगता था। साफ सफाई हेतु मेला ग्राउंड में ब्लीचिंग पाउडर डीडीटी का छिड़काव करवाया जाता था। शौचऔर मूत्र त्याग करने की अलग से व्यवस्थाएं होती थी।पीएचडी विभाग द्वारा अनेक जगह पर चापाकल लगाया जाता था,लेकिन आज यह सारी सुविधाये गायब है। बेतिया दशहरा मेला उत्तर बिहार के नामी-गिरामी मेलों में गिना जाता था,जहां दूर दराज के लोग मेला देखने आते थे, इस मेले का इंतजार लोगों को वर्ष भर रहता था। संवाददाता को मिली जानकारी के अनुसार,राज कचहरी मेला ग्राउंड की ऐसी दुर्दशा का जिम्मेवार केवल बेतिया राज में मौजूद कर्मी के मिली भगत के चलते ऐसी दुर्दशा हो चली है।समय रहते बेतिया राज कचहरी के मेला ग्राउंड से अतिक्रमण खाली नहीं कराया गया तो आने वाले दिनों में बेतिया फैंसी मेला काअस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा,साथ ही करोड़ों रुपए का राजस्व का चूना लग जाएगा।

Karunakar Ram Tripathi
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