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Sat, 28 Feb 2026 03:34 PM

परमेश्वर जी स्वयं में विचार थे, वे सेवा, समर्पण और समन्वय की स्वयं प्रतिमूर्ति थे - डॉ महेन्द्र अग्रवाल

#परमेश्वर_प्रसाद जी को संघ विचार परिवार ने दी भावपूर्ण श्रद्धांजलि।

परमेश्वर बाबू के लिए समाज ही ईश्वर था, जिसकी उन्होंने आजीवन सेवा की। वे आत्मीयता, सहजता और विनम्रता की प्रतिमूर्ति थे - रमेश जी, #प्रान्त_प्रचारक गोरक्ष

भानु प्रकाश

गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।

राष्ट्रीय_स्वयंसेवक_संघ व विचार परिवार द्वारा आज सरस्वती शिशु मंदिर (10+2) पक्कीबाग गोरखपुर के सरस्वती कक्ष में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया, जिसमें समाजसेवी और पथ-प्रदर्शक श्रद्धेय परमेश्वर प्रसाद जी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

सभा में उपस्थित गणमान्य नागरिकों, विचार परिवार के सदस्यों और शिक्षाविदों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।उक्त अवसर पर उनके पौत्र अनन्य गुप्त जी ने सबकी संवेदनाओं को स्वीकार किया।। वक्ताओं ने उनके जीवन और समाज के प्रति उनके योगदान पर प्रकाश डालते हुए अपने संस्मरण साझा किए। उन्होंने कहा कि परमेश्वर जी का सम्पूर्ण जीवन राष्ट्र और समाज की सेवा के लिए समर्पित रहा।

प्रान्त संघ चालक डॉ महेंद्र अग्रवाल जी ने कहा कि परमेश्वर जी से बहुत कुछ सीखने का अवसर मिला। उनकी विनम्रता का मैं कायल था। परमेश्वर जी स्वयं में विचार थे, वे सेवा, समर्पण और समन्वय की स्वयं प्रतिमूर्ति थे। सिर्फ संघ नहीं समाज के लिए भी उनका समर्पण अनुकरणीय था। उन्होंने दान नहीं बल्कि सेवा भाव से कार्य किया। सच्ची श्रद्धांजलि तब होगी जब उनके गुणों को अपने में समाहित करें।

प्रान्त प्रचारक रमेश जी ने कहा कि परमेश्वर जी का विचार ही परिवार का संस्कार बन गया। वे व्यक्ति नहीं विचार थे। उन्होंने अपने घर के साथ साथ समाज को भी प्रकाशित किया। अपने लिए तो सभी जीते है पर जो अपनो के लिए जीता है वो महान होता है। परमेश्वर बाबू। अस्वस्थ होने के बावजूद भी स्वयं आगे बढ़ कर सबसे सहर्ष मिलना उनकी श्रेष्ठता थी। वे उस नींव के तरह हैं जिस पर पूरी बिल्डिंग खड़ी है पर नींव दिखाई नहीं देती है कुछ ऐसा ही परमेश्वर जी का जीवन था। उनका परिवार भी उसी श्रद्धा से संघ के प्रति समर्पित है। उनकी पीढ़ियों में जो संस्कार व्यप्त है वो समाज के लिए उत्तरदायित्व वाला है। "मैं नहीं तू ही" यह सिद्धांत किसी परिवार में देखना हो तो वो परमेश्वर बाबू के परिवार में दिखता है जो पूरे समाज को ईश्वर के रूप में मान कर सेवा भाव से पूजा करते थे। परमेश्वर बाबू आत्मीयता, सहजता और विनम्रता से परिपूर्ण थे। उनके निधन से पूरा संघ परिवार स्तब्ध है। पुस्तकों से ज्यादा परमेश्वर जी के जीवन, व्यवहार और संस्कारों में संघ था। उन्होंने अपने व्यवहार से अनेकानेक लोगों को संघ सिखाया। मैं उन्हें संघ परिवार की तरफ से परमेश्वर बाबू को श्रद्धांजलि अर्पित करता हु। उनका जीवन हम सभी को आजीवन प्रेरणा देगा।

विभाग संचालक शेषनाथ सिंह जी ने कहा कि परमेश्वर जी महापुरुष थे और महापुरुष जिस रस्ते पर चलते हैं वह समाज के लिए अनुकरणीय बन जाता है।

ई सुरेन्द्र अग्रवाल जी ने कहा कि परमेश्वर जी से हमारा लगाव बचपन से था वो बहुत ही सरल स्वभाव के धनी थे।

सह विभाग संघचालक आत्मा सिंह जी ने कहा कि परमेश्वर जी ने जो स्नेह दिया वो अभूतपूर्व था। संगठन की हर अपेक्षा पर को खड़े रहे।

विद्या भारती क्षेत्र सह मंत्री रामनाथ गुप्त जी ने कहा कि समाज में प्रतिष्ठा बना आज चार पीढी से आपका परिवार सामाजिक कार्य व संघ कार्य से जुड़े है। फुलवरिया शिशु मंदिर के निर्माण के लिए जब गए तो आपकी तबीयत खराब थी लेकिन उस स्थिति में भी हमने जब निवेदन किया तो उन्होंने हर संभव सहयोग किया। प्रो ईश्वर शरण: यह संघ परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है। आपातकाल में उनका आवास हम सबके लिए केंद्र था। समाज उन्होंने आदर्श नागरिक के रूप में पहचान बनाई थी। उनका स्वभाव दुर्लभ था।

प्रो सदानंद गुप्त ने अपने संस्मरण साझा करते हुए कहा कि विद्यार्थी परिषद में कार्य करते हुए कभी आश्रय स्थल के रूप में श्रधेय परमेश्वर जी का ही आवास उपलब्ध रहता था। वो अत्यंत मृदुभाषी थे और संबंधों का निर्वहन बहुत ही आत्मीयता से करते थे।

सभा के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की और शोकाकुल परिवार के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की।

इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता, विचार परिवार के विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी एवं शहर के प्रबुद्ध जन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

Jr. Seraj Ahmad Quraishi
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